मिर्ज़ा असदुल्ला खान ग़ालिब

Ghalib Nama

ग़ालिब नामा

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले,
बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले।
1797 जन्म वर्ष
1,000+ अशआर
2 दीवान — उर्दू & फ़ारसी
दिलों में ज़िन्दा

चुनिंदा अशआर

तुम जानो तुम्हारा काम है दिलदार कहे जाओ
मुझको भी पता है तुम क्या हो पर प्यार कहे जाओ

मतलब: सच्चाई जानते हुए भी प्यार करना — यही इश्क़ की सबसे बड़ी त्रासदी है।

बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मेरे आगे,
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे।

मतलब: मेरे लिए दुनिया बच्चों के खेल जैसी है। हर दिन यहाँ नए-नए तमाशे होते रहते हैं।

क़ैद-ए-हयात और बंद-ए-ग़म, अस्ल में दोनों एक हैं,
मौत से पहले आदमी ग़म से निजात पाए क्यों?

मतलब: ज़िंदगी ख़ुद ही दुखों की क़ैद है। जब तक इंसान ज़िंदा है, दुखों से पूरी तरह आज़ाद नहीं हो सकता।

रंज से ख़ूगर हुआ इंसान तो मिट जाता है रंज,
मुश्किलें मुझ पर पड़ीं इतनी कि आसाँ हो गईं।

मतलब: जब इंसान दुख सहने का आदी हो जाता है, तो दुख भी आसान लगने लगता है।

हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया, पर याद आता है,
वो हर एक बात पे कहना कि यूँ होता तो क्या होता।

मतलब: इंसान चला जाता है, लेकिन उसकी बातें और अंदाज़ हमेशा याद रहते हैं।

दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है?
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है?

मतलब: ओ नासमझ दिल, तुझे क्या हुआ है? इस दर्द की कोई दवा भी है?

मिर्ज़ा असदुल्ला ख़ान ग़ालिब

मिर्ज़ा ग़ालिब (1797–1869) उर्दू और फ़ारसी के सबसे महान शायरों में से एक हैं। उनकी शायरी में प्रेम, दर्शन, और जीवन की गहरी सच्चाइयाँ बड़े खूबसूरत अंदाज़ में बयाँ होती हैं।

ग़ालिब नामा एक ऐसा मंच है जहाँ ग़ालिब के अशआर को आज की भाषा में समझाया जाता है — ताकि उनकी शायरी की रोशनी हर दिल तक पहुँच सके।

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